>

मां मनिला धाम (मंदिर ) का ऐतिहासिक वा सांस्कृतिक वृतांत अध्ययन

 

  • एतिहासिक मां मनिला धाम(मंदिर ) और अपनी अदभुत प्राकर्तिक खुबसूरती लिए मनिला जिला अलमोड़ा स्थित एक विहंगम पर्यटन स्थल है।

 

  •    इस मंदिर का अपना एक एतिहासिक महत्व है, इसका निर्माण कत्युरी राजवंश द्वारा किया गया था।

 

  • कत्युर शैली में बने इस मंदिर के दो भाग हैं पहला मल्ला मनिला और दुसरा तल्ला मनिला है, तल्ला और मल्ला कुमाऊँनी शब्द हैं जिनका अर्थ ऊपर और नीचे होता है।

 

  • समुद्री सतह से अठारह सौ मीटर ऊपर स्थित इस धाम से क्षेत्र के अविस्मरणीय दृश्य दिखाई देते हैं,मंदिर का आगे का हिस्सा सुनहरे रंग का है।

 

 

Sculpture of Ma Manila Devi

मां मानिला देवी मंदिर का पौराणिक महत्व


देवदार और चीड़ के घने जंगलों के बीच ऊंची चोटी में स्थित मां मानिला देवी मंदिर लोगों की अटूट आस्था का प्रतीक है। वर्ष 1488 में कत्यूरी राजा ब्रह्मदेव ने इस मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर में काले पत्थर से निर्मित दुर्गा माता और भगवान विष्णु की सुंदर मूर्तियां स्थापित हैं। पर्यटन की दृष्टि से भी मंदिर का विशेष महत्व है। मंदिर में मां के दर्शन को दूर-दूर से श्रद्धालुओं के साथ ही काफी संख्या में पर्यटक भी पहुंचते हैं।

मानिला देवी मंदिर का पौराणिक, पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्व है। वर्ष 1488 में कत्यूरी राजा ब्रह्मदेव ने इस मंदिर का निर्माण कराया। वर्ष 1977-78 में मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। देवदार, चीड़ के घने जंगलों के बीच ऊंची चोटी में स्थित मां मानिला देवी मंदिर लोगों की अटूट आस्था का प्रतीक है।
मां मनिला धाम (मंदिर )

मनिला देवी पर आधारित प्राचीन दंतकथा


कई साल पहले गांवों में आए दिन चोरी होती थी। मानिला देवी के मंदिर से चोरों के गांव में घुसने की आवाज सुनाई देती थी। माता के इस सूचना तंत्र से चोर परेशान हो गए और वह चोरी की घटनाओं को अंजाम नहीं दे पा रहे थे। नाराज चोरों ने एक दिन रात्रि में मानिला देवी की मूर्ति का दाहिना हाथ काट दिया और इसे अपने साथ ले। मंदिर से पांच किमी दूर जाकर चोर हुक्का पीने के लिए एक स्थान पर रुके और उन्होंने मानिला देवी का कटा हाथ जमीन पर रख दिया। इसके बाद जब वह जाने लगे तो देवी का कटा हाथ उठा नहीं पाए। काफी प्रयासों के बाद वह कटा हाथ वहीं छोड़ कर भाग निकले।

सुबह गांव में इस घटना की जानकारी मिलने के बाद लोगों ने सामूहिक प्रयास से इस स्थान पर मानिला देवी का एक और मंदिर बना दिया। अब तल्ला, मल्ला मानिला में देवी के मंदिर है। श्रद्धालुओं समेत नवविवाहित दंपति मंदिर में आकर पूजा पाठ कर मनौती मांगते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनौती को मानिला देवी पूरा कर देती हैं। मानिला देवी मंदिर समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह मनराल ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रात्रि विश्राम के लिए मंदिर में 24 कमरे बनाए गए हैं।